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बुधवार, 15 अगस्त 2012

मांस का मूल्य - बोध कथा


मगध के सम्राट् श्रेणिक ने एक बार अपनी राज्य-सभा में पूछा कि - "देश की खाद्य समस्या को सुलझाने के लिए सबसे सस्ती वस्तु क्या है?"

मंत्रि-परिषद्  तथा अन्य सदस्य सोच में पड़ गये। चावल, गेहूं, आदि पदार्थ तो बहुत श्रम बाद मिलते हैं और वह भी तब, जबकि प्रकृति का प्रकोप न हो। ऐसी हालत में अन्न तो सस्ता हो नहीं सकता। शिकार का शौक पालने वाले एक अधिकारी ने सोचा कि मांस ही ऐसी चीज है, जिसे बिना कुछ खर्च किये प्राप्त किया जा सकता है।

उसने मुस्कराते हुए कहा, "राजन्! सबसे सस्ता खाद्य पदार्थ तो मांस है। इसे पाने में पैसा नहीं लगता और पौष्टिक वस्तु खाने को मिल जाती है।"

सबने इसका समर्थन किया, लेकिन मगध का प्रधान मंत्री अभय कुमार चुप रहा।

श्रेणिक ने उससे कहा, "तुम चुप क्यों हो? बोलो, तुम्हारा इस बारे में क्या मत है?"

प्रधान मंत्री ने कहा, "यह कथन कि मांस सबसे सस्ता है, एकदम गलत है। मैं अपने विचार आपके समक्ष कल रखूंगा।"

रात होने पर प्रधानमंत्री सीधे उस सामन्त के महल पर पहुंचे, जिसने सबसे पहले अपना प्रस्ताव रखा था। अभय ने द्वार खटखटाया।

सामन्त ने द्वार खोला। इतनी रात गये प्रधान मंत्री को देखकर वह घबरा गया। उनका स्वागत करते हुए उसने आने का कारण पूछा।

प्रधान मंत्री ने कहा,- "संध्या को महाराज श्रेणिक बीमार हो गए हैं। उनकी हालत खराब है। राजवैद्य ने उपाय बताया है कि किसी बड़े आदमी के हृदय का दो तोला मांस मिल जाय तो राजा के प्राण बच सकते हैं। आप महाराज के विश्ववास-पात्र सामन्त हैं। इसलिए मैं आपके पास आपके हृदय का दो तोला मांस लेने आया हूं। इसके लिए आप जो भी मूल्य लेना चाहें, ले सकते हैं। कहें तो लाख स्वर्ण मुद्राएं दे सकता हूं।"

यह सुनते ही सामान्त के चेहरे का रंग फीका पड़ गया। वह सोचने लगा कि जब जीवन ही नहीं रहेगा, तब लाख स्वर्ण मुद्राएं भी किस काम आएगी!

उसने प्रधान मंत्री के पैर पकड़ कर माफी चाही और अपनी तिजौरी से एक लाख स्वर्ण मुद्राएं देकर कहा कि इस धन से वह किसी और सामन्त के हृदय का मांस खरीद लें।

मुद्राएं लेकर प्रधानमंत्री बारी-बारी से सभी सामन्तों के द्वार पर पहुंचे और सबसे राजा के लिए हृदय का दो तोला मांस मांगा, लेकिन कोई भी राजी न हुआ। सबने अपने बचाव के लिए प्रधानमंत्री को एक लाख, दो लाख और किसी ने पांच लाख स्वर्ण मुद्राएं दे दी। इस प्रकार एक करोड़ से ऊपर स्वर्ण मुद्राओं का संग्रह कर प्रधान मंत्री सवेरा होने से पहले अपने महल पहुंच गए और समय पर राजसभा में प्रधान मंत्री ने राजा के समक्ष एक करोड़ स्वर्ण मुद्राएं रख दीं।

श्रेणिक ने पूछा, "ये मुद्राएं किसलिए हैं?"

प्रधानमंत्री ने सारा हाल कह सुनाया और बो्ले,- " दो तोला मांस खरीदने के लिए इतनी धनराशी इक्कट्ठी हो गई किन्तु फिर भी दो तोला मांस नहीं मिला। अपनी जान बचाने के लिए सामन्तों ने ये मुद्राएं दी हैं। अब आप सोच सकते हैं कि मांस कितना सस्ता है?"

जीवन का मूल्य अनन्त है। हम यह न भूलें कि जिस तरह हमें अपनी जान प्यारी होती है, उसी तरह सबको अपनी जान प्यारी होती है।

(Price Versus Cost of Meat - English translation of this article is available at Niramish English)

सोमवार, 9 अप्रैल 2012

आहार ही औषध - फ़ल-चिकित्सा


फ़ल-चिकित्सा:फ़लों से करें रोग निवारण.

यह तो प्रायः सभी जानते हैं कि फ़ल और सब्जियां सबसे अच्छे भोज्य पदार्थ हैं।अत: भोजन में इनको ज्यादा से ज्यादा शामिल करना अच्छे स्वास्थ के लिये बेहद जरूरी है। यहां मैं उन लोगों के लिये जो विभिन्न प्रकार के रोगों से संघर्ष करते हुए जीवन जी रहे हैं ,रोगों के अनुसार फ़लों व सब्जियों से चिकित्सा का प्रावधान प्रस्तुत कर रहा हूं। आप आयुर्वेदिक, ऐलोपैथिक, यूनानी जो भी ईलाज ले रहे हों, फ़ल-सब्जी से चिकित्सा का आप अतिरिक्त लाभ उठा सकते हैं। फ़लों और सब्जियों में एन्टिओक्सीडेंट्स पाये जाते हैं। शरीर का इम्यून पॉवर यानी रोग-प्रतिकार क्षमता बढती है।

  • उच्च रक्त चाप:

अंगूर, टमाटर, अखरोट, तरबूज, संतरा, सेवफ़ल, केला, नाशपती, पत्तागोभी, लहसुन, ककडी, नींबू.

  • रक्ताल्पता,एनीमिया,खून की कमी:

टमाटर, संतरा, अंगूर, सेवफ़ल, स्ट्राबेरी,चुकंदर, गाजर, अंजीर, आलूबुखारा, दाख, पालक, शलजम.

  • उच्च कोलेस्टरोल(खराब वाला):

आम, अखरोट, सेवफ़ल, जामुन, गाजर, प्याज, लहसुन, संतरा.

  • हृदय के रोग:

सेवफ़ल, अख्र्रोट, केला, पाएनेपल, तरबूज, नाशपती.

  • लिवर के विकार:

पपीता, नीबू, अंगूर, गाजर, टमाटर, ककडी, चुकंदर.
  • धमनियां कठोर हो जाना:

संतरा, टमाटर, सेवफ़ल, स्ट्राबेरी, अखरोट, केला.

  • मधुमेह,डायबीटीज,शूगर:

टमाटर, तरबूज, नाशपती, अमरूद, खट्टे फ़ल.

  • छोटी आंत में पीडा,मरोड,दर्द:

अंगूर टमाटर, सेवफ़ल, केला, अमरूद, पाईनेपल.

  • खांसी:

अंगूर, सेवफ़ल, स्ट्राबेरी, नाशपती, पाईनेपल, गाजर, नींबू.प्याज, पालक, संतरा.

  • अतिसार,दस्त लगना:

सेवफ़ल.

  • बदहजमी:

पपीता, सेवफ़ल, अंगूर, गाजर, चुकंदर, नीबू,संतरा, पाईनेपल, पालक.

  • बवासीर:

सेवफ़ल, केला, अंगूर, संतरा, पपीता, पाईनेपल, गाजर, पालक, शलजम.

  • संधिवात:

अंगूर, सेवफ़ल, गाजर, नींबू, नाशपाती, ककडी, पाईनेपल, टमाटर, लाल मिर्च, संतरा, चुकंदर, पालक.

  • गठिया:

अनानास(पाईनेपल),ककडी,चुकंदर,पालक,टमाटर.

  • दांत की तकलीफ़:

अंगूर, स्ट्राबेरी.

  • चर्म रोग:

सेवफ़ल, टमाटर, पपीता, अखरोट, स्ट्राबेरी.

  • फ़्लू बुखार:

नींबू, पाईनेपल, लोकाट, स्ट्राबेरी.

  • गर्भवती को उल्टी होना:

नाशपती

  • कमर दर्द: 

तरबूज, नाशपती.

  • पीठ दर्द:

तरबूज, नाशपती.

  • मोटापा:

नीबू, संतरा, अंगूर, पाईनेपल, पपीता, चुकंदर, गोभी, टमाटर।
(सेवफ़ल सप्ताह में एक बार आधा लिटर जूस पीयें।)

  • वातव्याधि:

विटामिन" सी" और एंटी ओक्सेडेंट परिपूर्ण फ़लों का सेवन करं।

  • हार्ट अटेक,स्ट्रोक:

रसभरी फ़ल(रास्पबेरी)
जितना भी पचा सकें ,खाएं। इससे धमनी का रक्त दाब घटता है और कोलेस्टरोल की मात्रा भी संतुलित होती हैं।

  • मुख पाक,मुख के संक्रमण:

सतरा, नाशपती, अमरूद.

  • किडनी फ़ेल्योर रोगी: (जो रोगी डायलिसिस पर चल रहे हों उन्हें ककडी का जूस कई महीने देते रहने से डायलिसिस की जरूरत नहीं रहेगी। किडनी एक्टीवेट करने वाला फ़ल है-)

सेवफ़ल, संतरा, नीबू, गाजर,चुकंदर का रस भी उपयोगी हैं।

  • बुढापा रोकने वाले फ़ल:

सेवफ़ल, पत्तागोभी, ब्रोकली,जामुन, आंवला, लहसुन, अंगूर, मूली, पालक, टमाटर.

  • दमा,अस्थमा:

गाजर, संतरा, नाशपाती, लाल मिर्च.

  • सर्दी,जुकाम:

लहसुन, गाजर, पत्तागोभी, नीबू, प्याज, संतरा,स्ट्रॉबेरी, पाईनेपल.

  • कब्ज:

गाजर, पत्तागोभी, अंजीर, अंगूर, संतरा, पपीता, आलूबुखारा, कद्दू, चुकंदर, सेवफ़ल, शलजम.

  • चेहरे पर कील,मुहासे:

आम, गाजर, अंगूर, संतरा, तरबूज, प्याज, कद्दू, पालक, स्ट्राबेरी.

  • ब्लाडर,मूत्राषय समस्याएं:

नीबू, ककडी, गाजर, सेवफ़ल.

  • नींद की कमी,निद्राल्पता:

नीबू, गाजर, अंगूर, सेवफ़ल.

  • पीलिया:

नीबू, गाजर, नाशपाती, अंगूर, पालक, चुकंदर, ककडी, पपीता.

  • नाडी मंडल का दर्द,न्यूराईटीज:

पाईनेपल, सेवफ़ल, गाजर, चुकंदर, संतरा.

  • मासिक धर्म के विकार:

आलू बुखारा, शलजम, चुकंदर, पालक, अंगूर.

  • एक्जीमा:

गाजर, लाल अंगूर, पालक, ककडी, चुकंदर.

  • सिर दर्द:

नीबू, गाजर, अंगूर, पालक.

  • मिर्गी रोग,एपिलेप्सी:

पालक, अंजीर, गाजर, लाल अंगूर.

  • किडनी विकार:

सेवफ़ल, नीबू,संतरा, ककडी, गाजर, चुक्कंदर.
  • पेट के अल्सर:

अंगूर, गोभी, गाजर.

  • गले के विकार:

नीबू, संतरा, पाईनेपल, गाजर, मूली, पालक, आलूबुखारा, टमाटर, प्याज.

लेखक - डॉ. दयाराम आलोक,
लेखक परिचय  

डॉ. दयाराम आलोक,
एम.ए., आयुर्वेद रत्न,D.I.Hom(London), व्यवसाय-हर्बल चिकित्सा।

आप विशेषत: गुर्दे एवं पित्ताशय की पथरी और प्रोस्टेट वृद्धि से मूत्र बाधा की चिकित्सा में सलग्न है। समाजसेवा के कार्य में विशेष गरीब परिवारों की कन्याओं के लिये स्ववित्तपोषित नि:शुल्क समूह विवाह के आयोजन करते है। आप ‘अखिल भारतीय दामोदर दर्जी महासंघ.’ के संचालक है। इन्टरनेट पर सामाजिक, स्वास्थ्य विषयक एवं कविता के ब्लॉग लिखना इनकी प्रधान रुचियों में से है।
प्रमुख ब्लॉग :

शुक्रवार, 16 मार्च 2012

शाकाहार अपनाइये प्रसन्न रहिये।

शाकाहार अपनाइये प्रसन्न रहिये।

शाकाहार स्वास्थ्यप्रद है, इस तथ्य में किसी को भी शंका नहीं है। आज के समय में हर किसी को पता है कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी अच्छे स्वास्थ्य के कारण शाकाहार की ओर प्रवृत्त हो रहे हैं। भारतीय विचारधारा और हमारे व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर यह समझा जाता है कि मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य पर भी शाकाहार का अनुकूल प्रभाव पड़ता है। अभी तक इस विषय पर कोई वैज्ञानिक अध्ययन न होने के कारण वैज्ञानिक दायरों में विशेषकर मांसाहार-मत्स्याहार को प्रोत्साहन देने वाले विभागों में शायद यह बात खुलकर नहीं कही जा रही हो, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। पश्चिम में शाकाहार का प्रचलन बढने के साथ-साथ उसके स्वास्थ्य प्रभावों के वैज्ञानिक अध्ययन बढ रहे हैं और निरामिष भोजन शैली के पक्ष में नई-नई अकाट्य जानकारियाँ सामने आ रही हैं।

पिछले दिनों देखा गया था कि अज्ञानवश अफ़वाहें फैलाने वाले कुछ लोग तो शाकाहार को अल्ज़ाइमर और बौद्धिक बौनेपन से भी जोड़ने का अधकचरा प्रयत्न कर रहे थे। ऐसी अफ़वाहों के पीछे कुछ सामान्य भ्रम थे, जैसे मत्स्य या मांस को आवश्यक पोषक तत्वों का अकेला आपूर्तिकारक मानना।

ऐसे ही भ्रमों के बारे में सत्य जानने के लिये एक अध्ययन अमेरिका के ऐरिज़ोना राजकीय विश्वविद्यालय के पोषण विभाग में डॉ बॉनी बीज़होल्ड (Bonnie L Beezhold) के नेतृत्व में हुआ था जिसकी रिपोर्ट जून 2010 से अंतर्जाल पर उपलब्ध है। इस अध्ययन में संयुक्त राज्य के दक्षिण पश्चिम क्षेत्र के सेवेंठ डे ऐड्वेंटिस्ट समुदाय से स्वस्थ भागीदारों को लेकर उन्हें पहले शाकाहारी या मांसाहारी भोजन उपलब्ध कराया गया और फिर उनसे 152 प्रश्नों की निम्न तीन प्रश्नावलियों के आधार पर जाँच की गयी:

  • भोजन की आवृत्ति
  • अवसाद, बेचैनी, तनाव की मात्रा (DASS=Depression Anxiety Stress Scale)
  • बदनुमाई की माप (POMS=Profile of Mood States) 


इस अध्ययन से एक बार फिर यह बात स्पष्ट हुई कि शाकाहार करने से जीवन में प्रसन्नता पढती है, तनाव और अवसाद कम होता है और यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिये मांसाहार से कहीं अधिक हितकर है। इस अध्ययन में यह बात भी सामने आयी कि मछली खाने वालों के मुकाबले कुछ कम ओमेगा-3 की मात्रा होने पर भी शाकाहारियों पर इसका कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता है।

इस अध्ययन के लिये तैयार हुये स्त्री व पुरुषों में 64 शाकाहारी और 79 मांसाहारी थे जिनमें से गर्भवती लोगों को अध्ययन से हटाने के बाद 138 लोग बचे। मांसाहारियों में अवसाद, बेचैनी व तनाव की मात्रा शाकाहारियों से दोगुनी थी। बदनुमाई की मात्रा में भी मांसाहारी शाकाहारियों से कहीं आगे थे। शाकाहारी भोजन में वसा की मात्रा भी मांसाहारियों से कम पाई गयी।  इस अध्ययन ने इस जानकारी को फिर से पुष्ट किया है कि शाकाहार अपनाने में ही बुद्धिमानी है और शरीर और मस्तिष्क का हित भी है।

अधिक जानकारी के लिये इस अध्ययन की झलक देने के लिये परिणामों की एक तालिका यहाँ प्रस्तुत है। और अधिक जानकारी के इच्छुक न्युट्रिशन जर्नल पर पूरी रिपोर्ट पढ सकते हैं।

* शाकाहारी बनें, प्रसन्न रहें, स्वस्थ रहें!*

परिणाम तालिका - बायोमेड सेंट्रल से साभार (© 2010 Beezhold et al; licensee BioMed Central Ltd.)

DASS and POMS scores by diet group

OMNVEGP

Mean± SEMean± SEvalue

n = 78n = 60*



DASS-total117.511.888.320.880.000
     DASS-D4.810.691.670.280.000
     DASS-A4.310.531.530.240.000
     DASS-S8.400.925.120.520.024






POMS-total215.333.100.101.990.007
     Tension-anxiety6.043.833.830.400.031
     Depression-dejection8.990.804.364.100.000
     Anger-hostility7.086.724.280.550.010
     Fatigue7.590.665.030.470.021
     Confusion4.650.433.240.380.085
     Vigor19.150.7120.610.710.133

* < 0.05 is significant.
1 DASS normative scores: D-5.55, A-3.56, S-9.27, total 18.38.
2 POMS normative scores, M-F: T 7.1-8.2, D 7.5-8.5, A 7.1-8.0, V 19.8-18.9, F 7.3-8.7, C 5.6-5.8, total 14.8-20.3.
Beezhold et al. Nutrition Journal 2010 9:26   doi:10.1186/1475-2891-9-26


 कीवर्ड: Bonnie L Beezhold, Carol S. Johnston, Deanna R. Daigle, Arizona State University

शनिवार, 21 जनवरी 2012

भारत के प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट हुसैन ज़ामिन जी को नमन

यह अपडेट भारत के प्रसिद्ध कार्टून आर्टिस्ट श्रीमान हुसैन जामिन साहब का है। यह अपडेट अपने आप ही बहुत कुछ बयान कर रहा है। मुझे और कुछ लिखने या कहने की जरूरत नहीं। श्री जामिन साहब का कहना है कि यह उनका नितांत व्यक्तिगत फैसला है। इस अपडेट के माध्यम से वे न तो मुस्लिम समुदाय के विरुद्ध कोई सन्देश दे रहे हैं और न ही अपने इस कृत्य के जरिये किसी भी अन्य व्यक्ति की जीवन शैली या भोजन शैली को प्रभावित करना चाहते हैं।

श्रीमान हुसैन जामिन साहब का फेसबुक अपडेट 

भारत के शिरोमणि कार्टूनिस्टों में शुमार श्री हुसैन ज़ामिन जी के इस निर्णय पर सादर नमन!

इसी ब्लॉग पर उन महानुभावों के बारे में जान चुके हैं  जिन्होने गतवर्ष शाकाहार अपनाकर अहिंसा और जीवदया के सद्प्रयास को बल दिया:
* दीप पांडेय
* इम्तियाज़ हुसैन
* कुमार राधारमण
* शिल्पा मेहता

शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

इम्तियाज़ की 'युवा पहल' करूणा का 'आलोक' और जीवों की 'आशीष'

अभिनन्दन!!इम्तियाज़ भाई, 

इस रहमदिल संकल्प के लिए,

जीवों को अभयदान देने के लिए,

आपकी करूणा भरी सम्वेदनाओं के लिए।


सुनियोजित सुदृढ़ता के साथ माँसाहार त्याग के लिए॥


इम्तियाज़ की 'युवा पहल' करूणा का 'आलोक' और निरीह जीवों की 'आशीष'

मित्रों,

आलोक मोहनजी  निरामिष समर्थक है, उन्होनें पहले भी अपने मित्र आशीष जी को शाकाहार के प्रति जाग्रत किया था। और आशीष जी ने भी जीवदया के वशीभूत मांसाहार का सर्वदा त्याग कर निरीह प्राणियों को अभयदान दिया था। यह कहते हुए कि-""अपने स्वाद के लिए मासूम  जीवों  की हत्या गलत है, पाप है" 

पिछले दिनों ब्लॉग "युवा पहल" पर  उत्तरप्रदेश में स्थापित होने जा रहे स्वचलित कत्लखानों के विरोध में एक पोस्ट लगायी जिसमें जीवहिंसा के विरोध स्वरूप  05223095743 नम्बर पर मिसकॉल करने का अनुरोध था। इस आलेख पर हुई चर्चा के परिणामस्वरूप आदरणीय इम्तियाज़ भाई नें पहले स्वयं चिंतन किया, मात्र कथनी नहीं करके बतानें का संकल्प लिया। प्रथम स्वयं के मनोबल को मजबूत किया और माँसाहार त्याग का प्रण लिया।

आप देखिए वह चर्चा……

इम्तियाज़ भाई हम आपका सम्मान करते है, अल्लाह आपको इस संकल्प पर दृढ़ रहने की शक्ति प्रदान करे।
जो प्राणियों पर रहम करता है, अल्लाह अवश्य उस पर रहम करते है। आमीन!!

शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

शाकाहार के प्रति वैश्विक आकर्षण

आहार सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण तत्व है, जिसका व्यक्तित्व निर्माण से घनिष्ठ सम्बन्ध है. आहार दो प्रकार के है- शाकाहार और मांसाहार. फल, सब्जी, अनाज, बादाम आदि, बीज सहित वनस्पति-आधारित भोजन के प्रयोग को शाकाहार कहते हैं. आजकल शाकाहार का प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है, यह परिवर्तन जागरुकता के कारण हो रहे हैं. जैसा आहार लिया जाता है, वैसे ही भाव-विचार और आचार होते हैं.

हमारी पश्चिमी दुनिया के अनुसार मुख्य रूप से चार प्रकार के शाकाहारी होते हैं. एक लैक्टो-शाकाहारी जिनके आहार में दुग्ध उत्पाद शामिल हैं लेकिन मीट, मछली और अंडे नहीं. एक ओवो शाकाहारी जिनके आहार में अंडे शामिल होते हैं लेकिन मगर मीट, मच्छी और दूग्ध-उत्पाद नहीं खाते. और एक ओवो-लैक्टो-शाकाहारी जिनके आहार में अंडे और दुग्ध उत्पाद दोनों शामिल हैं. एक वेगन अर्थात अतिशुद्ध शाकाहारी जो दूध तो क्या शहद भी नहीं खाते. इस के अनुसार भारत में हम हिन्दू जो शाकाहार में विश्वास रखते हैं लैक्टो-शाकाहारी के अन्तरगत आते हैं. क्योंकि हम शहद, दूध और दूध से बने पदार्थों का सेवन करते हैं.

पश्चिमी दुनिया में, 20वीं सदी के दौरान पोषण, नैतिक, और अभी हाल ही में, पर्यावरण और आर्थिक चिंताओं के परिणामस्वरुप शाकाहार की लोकप्रियता बढ़ी. अमेरिकन डाएटिक एसोसिएशन और कनाडा के आहारविदों का कहना है कि जीवन के सभी चरणों में अच्छी तरह से योजनाबद्ध शाकाहारी आहार “स्वास्थ्यप्रद, पर्याप्त पोषक है और कुछ बीमारियों की रोकथाम और इलाज के लिए स्वास्थ्य के फायदे प्रदान करता है”.

मेडिकल साईंस व बडे-बडे डॉक्टर एवं आहार विज्ञानी आज यह मानते हैं कि शाकाहारी आहार में हर प्रकार के तत्व जैसे प्रोटीन, विटामिन, खनिज लवण आदि पायें जाते हैं. शाकाहार में संतृप्त वसा, कोलेस्ट्रॉल और प्राणी प्रोटीन का स्तर कम होता है, और कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, मैग्नीशियम, पोटेशियम और विटामिन सी व ई जैसे एंटीऑक्सीडेंट तथा फाइटोकेमिकल्स का स्तर उच्चतर होता है. एक शाकाहारी को ह्रदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह टाइप 2, गुर्दे की बीमारी, अस्थि-सुषिरता (ऑस्टियोपोरोसिस), अल्जाइमर जैसे मनोभ्रंश और अन्य बीमारियां कम हुआ करती हैं. शाकाहारियों को मांसाहारियों कि तुलना में बेहतर मूड का पाया गया और शाकाहार जीवन को दीर्धायु, शुद्ध, बलवान एवं स्वस्थ बनाता है.

मांसाहार का उपभोग पशुओं से मनुष्यों में अनेक रोगों के संक्रमण का कारण हो सकता है. साल्मोनेला के मामले में संक्रमित जानवर और मानव बीमारी के बीच संबंध की जानकारी अच्छी तरह स्थापित हो चुकी है. 1975 में, एक अध्ययन में सुपर मार्केट के गाय के दूध के नमूनों में 75 फीसदी और अंडों के नमूनों में 75 फीसदी ल्यूकेमिया (कैंसर) के वायरस पाए गये. 1985 तक, जांच किये गये अंडों का लगभग 100 फीसदी, या जिन मुर्गियों से वे निकले हैं, में कैंसर के वायरस मिले. मुर्गे-मुर्गियों में बीमारी की दर इतनी अधिक है कि श्रम विभाग ने पोल्ट्री उद्योग को सबसे अधिक खतरनाक व्यवसायों में एक घोषित कर दिया. आज भी समय समय पर ऐसे रोगों की पुष्टि होती है जिनकी वजह मांसाहार को माना जाता है.

हिन्दू धर्म के अधिकांश बड़े पंथों ने शाकाहार को एक आदर्श के रूप में संभाले रखा है. इसके मुख्यतः तीन कारण हैं: पशु-प्राणी के साथ अहिंसा का सिद्धांत; आराध्य देव को केवल “शुद्ध” (शाकाहारी) खाद्य प्रस्तुत करने की नीयत और फिर प्रसाद के रूप में उसे वापस प्राप्त करना; और यह विश्वास कि मांसाहारी भोजन मस्तिष्क तथा आध्यात्मिक विकास के लिए हानिकारक है.

अपनी रुचि और आर्थिक स्थिति के अनुसार पदार्थों का चयन कर शाकाहारी भोजन तैयार किया जा सकता है. मांसाहार की अपेक्षा शाकाहार सस्ता होने के साथ-साथ स्वादिस्ट, रोगप्रतिरोधक तथा शक्तिप्रद भी होता है. फल सब्जियों तथा कुछ विशेष प्रकार के फाइबर अनेक रोगों को दूर करने में अचूक औषधि का काम करते हैं. जब सभी प्रकार के विटामिन्स तथा पौष्टिक तत्त्व शाकाहार से पूर्ण हो सकती है तो क्यों जीवित प्राणियों की हत्या करके मांसाहार की क्या जरूरत है ? प्रकृति ने कितनी चीजें दी हैं जिन्हें खाकर हम स्वस्थ रह सकते है फिर मांस ही क्यों ? अब तय आपको करना है कि शाकाहार बेहतर है या मांसाहार.

ऎसे युवाओं की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, जो मांसाहार को किसी भी रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. शाकाहार एक सर्वोत्तम आहार है जो मानव के अन्दर संतोष, सादगी, सदाचार, स्नेह, सहानुभूति और समरसता जैसे चारित्रिक गुणों का विकास कर सकता है. भरपूर पौष्टिक खाना शरीर को ऊर्जा देता है जो मांस से नहीं मिल सकता. शाकाहारी का मन जितना संवेदनशील होता है. एक संतुलित सामाजिक प्रगति के लिये शाकाहार की अनिवार्यता अपरिहार्य है.