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रविवार, 6 जनवरी 2013

भारतीय धर्म-दर्शन संस्कृति और हिंसा?

भारतीय सनातन संस्कृति में हिंसा व माँसभक्षण की न तो कोई आज्ञा है और न कोई अनुमति। यह बात अलग है कि कभी क्षेत्र के कारण तो कभी अज्ञानता में या कभी देखा देखी जन साधारण में इस कुरीति का अस्तित्व रहा है। किन्तु आर्ष ग्रंथों में या उपदेशों में किंचित भी पशु-हिंसा का अनुमोदन या मांसभक्षण की अनुज्ञा, अनुमति का कोई अस्तित्व नहीं है। भारतीय संस्कृति अहिंसा प्रधान संस्कृति है।

सनातन संस्कृति के वेदों से ही अहिंसा की अजस्र धारा प्रवाहित रही है। 

वैसे तो सभी धर्म जीवों के प्रति करूणा को महत्व देते है। 

किन्तु कईं बाहरी संस्कृतियों में पशु हिंसा की प्रतीकात्मक कुरीतियाँ रूढ़ हो चुकी है। 

जबकि भारतीय संस्कृति के सभी ग्रंथ जीव हत्या को स्पष्ट अधर्म बताते है। 

भारतीय संस्कृति की तो आधारशिला में ही अहिंसा का सद्भाव रहा है।

इसलिए,वैदिक संस्कृति में माँसाहार का स्पष्ट निषेध है।

वस्तुत: वैदिक यज्ञों में पशुबलि---एक भ्रामक दुष्प्रचार है

भला यज्ञ हो तो हिंसा कैसे हो सकती है?

ऋषभक बैल नहीं, ऋषभ कंद है।- ऋषभक का परिचय


इसलिए यदि 'धर्म' के परिपेक्ष्य चिंतन करें तो उसमें हिंसा और हिंसा के प्रोत्साहक माँसाहार का अस्तित्व भला कैसे हो सकता है। पशुहत्या का आधार मानव की कायर मानसिकता है, जब शौर्य व मनोबल क्षीण होता है तो क्रूर-कायर मनुष्य, दुस्साहस व धौंस दर्शाने के लिए पशुहिंसा व मांसाहार का आसरा लेता है। लेकिन पशुहिंसा से क्रूरता व कायरता को कोई आधार नहीं मिलता। निर्बल निरीह पशु पर अत्याचार को भला कौन बहादुरी मानेगा। क्रूरता से कायरता छुपाने के प्रयत्न विफल ही होते है।

सोमवार, 31 दिसंबर 2012

निरामिष निष्कर्ष

"निरामिष"सामूहिक ब्लॉग के दो वर्ष सम्पन्न. प्रस्तुत है विभिन्न आलेखोँ के प्रकाश में निरामिष निष्कर्ष.....
"निर्जर निरामिष" - अमृत है शाकाहार
"निरोगी निरामिष" - स्वास्थ्यप्रद है शाकाहार
"निर्विकार निरामिष" - विकार रहित है शाकाहार
"निरापद निरामिष" - आपदा रहित है शाकाहार
"निसर्गमित्र निरामिष" - पर्यावरण मित्र है शाकाहार
"निर्मल निरामिष" - शुद्ध सात्विक है शाकाहार
आरोग्य वर्धक (स्वास्थ्यप्रद शाकाहार) 
  1. स्वस्थ व दीर्घ जीवन का आधार है शाकाहार। 
  2. आरोग्य संवर्धक है शाकाहार। 
  3. विश्व स्वास्थ्य शाकाहार में निहित है। 
  4. रोगप्रतिरोध शक्तिवर्धक है शाकाहार। 
सभ्य-खाद्याचार (सुसंस्कृत सभ्य आहार) 
  1. अप्राकृतिक भोज्य विकृति का सुसंस्कृत रूप है शाकाहार । 
  2. आदिमयुग से विकास और सभ्यता की धरोहर है शाकाहार। 
  3. शाकाहारी संस्कृति का संरक्षण ही हमारी सुरक्षा है। 
  4. मानवीय जीवन-मूल्यों का संरक्षक है शाकाहार। 
तर्कसंगत-विकल्प (सर्वांग न्यायसंगत) 
  1. प्रागैतिहासिक मानव, प्राकृतिक रूप से शाकाहारी ही था। 
  2. मनुष्य की सहज वृति और उसकी कायिक प्रकृति दोनो ही शाकाहारी है।
  3. मानव शरीर संरचना शाकाहार के ही अनुकूल। 
  4. शाक से अभावग्रस्त, दुर्गम क्षेत्रवासी मानवो का अनुकरण मूर्खता!!
  5. सभ्यता व विकास मार्ग का अनुगमन या भीड़ का अंधानुकरण? 
  6. यदि अखिल विश्व भी शाकाहारी हो जाय, सुलभ होगा अनाज!!
  7. भुखमरी को बढाते ये माँसाहारी और माँस-उद्योग!!
  8. शाकाहार में भी हिंसा? एक बड़ा सवाल !!! 
  9. प्राणी से पादप : हिंसा का अल्पीकरण करने का संघर्ष भी अपने आप में अहिंसा है। 
  10. प्रोटीन प्रलोभन का भ्रमित दुष्प्रचार।
  11. प्रोटीन मात्रा, प्रोटीन यथार्थ
  12. विटामिन्स का दुष्प्रचार।
  13. विटामिन बी12, विटामिन डी, विटामिन 'सी'।
  14. उर्ज़ा व शक्ति का दुष्प्रचार।