बुधवार, 26 जनवरी 2011

मनुष्य शाकाहारी या माँसाहारी....? (कायिक प्रकृति)

बहुत समय से मन में यह जिज्ञासा उठती थी......... 

मानव का ह्रदय क्यों चित्कार उठता है जीव हत्या देखकर? 

क्या माँसाहारी पशुओं में दया, करुणा और प्रेम की भावना होती है?

इन प्रश्नों के कुछ जवाब मुझे प्राप्त हुए। 

आप भी जानें मानव, शाकाहारी पशुओं और माँसाहारी पशुओं में अंतर.... 

*पंजे- 

माँसाहारी-इनके पंजे शिकारियों की तरह होते हैं नुकीले धारधार। शाकाहारी और मनुष्य- इनके पंजे इस प्रकार नहीं होते। 

*स्वेद ग्रंथि- 

माँसाहारी-इनमें स्वेद ग्रंथि /त्वचा में रोम छिद्र नहीं होते तो ये जीभ के माध्यम से शरीर का तापमान नियंत्रित करते हैं। शाकाहारी और मनुष्य-इनके शरीर में रोम छिद्र /स्वेद ग्रंथियां उपस्थित होती हैं और ये पसीने के माध्यम से अपने शरीर का तापमान नियंत्रित रखते हैं। मांसाहारी पशु के आन्तरिक अव्यव 

*दाँत- 

माँसाहारी- इनमें चिड़फाड़ के लिए नुकीले दाँत होते हैं पर चपटे मोलर दाँत जी चबाने/पिसने के काम आते हैं नहीं होते। शाकाहारी और मनुष्य- दोनों में तेज नुकीले दाँत नहीं होते जबकि इनमें मोलर दाँत होते हैं। 

*आहारनालतंत्र- 

माँसाहारी- इनमें Intestinal tract शरीर की लम्बाई के ३ गुनी होती है ताकि पचा हुआ मांस शरीर से जल्द निकल सके। शाकाहारी और मनुष्य- इनमें Intestinal tract शरीर की लम्बाई के १०-१२ गुनी लम्बी होती है। मनुष्य के आन्तरिक अव्यव 

*पाचक रस माँसाहारी- 

इनमें बहुत ही तेज पाचक रस (HCl- हैड्रोक्लोरिक अम्ल ) होता है जो मांस को पचाने में सहायक है। शाकाहारी और मनुष्य- इनमें पाचक रस (अम्ल) माँन्साहारियों से २० गुना कमजोर होती है। *लार ग्रंथि - माँसाहारी- इनमें भोजन के पाचन के प्रथम चरण के लिए अथवा भोजन को लपटने के लिए आवश्यक लार ग्रंथियों की आवश्यकता नहीं है। शाकाहारी और मनुष्य- इनमें अनाज व फल के पाचन के प्रथम चरण हेतु मुख में पूर्ण विकसित लार ग्रंथि उपस्थित होते हैं। 

*लार- 

मांसाहारियों - में अनाज के पाचन के प्रथम चरण में आवश्यक एंजाइम टाइलिन (ptyalin) लार में अनुपस्थित होती है। इनका लार अम्लीय प्रकृति की होती है। शाकाहारी और मनुष्य- में एंजाइम टाइलिन (ptyalin) लार में उपस्थित होती है व इनका लार क्षारीय प्रकृति की होती है। 

यह चार्ट A.D. Andrews, Fit Food for Men, (Chicago: American Hygiene Society, 1970) पर आधारित है।  
अधिक जानकारी के लिए कृपया यह साईट जरूर देखें।

इसके अलावा एक और बात मैंने गौर की है वह है इनके पानी पीने के तरीके.... क्या आपने कभी यह गौर किया है ?मांसाहारी पशु अपने जीभ से चांट कर पानी /द्रव पीते हैं जबकि शाकाहारी और मनुष्य मुँह से पानी पीते हैं। इन कुछ उदहारण को देखकर बताइए कि मनुष्य शाकाहारी है या मांसाहारी ?अपनी अंतरात्मा से पूछिए जवाब जरूर मिलेगा।..... यदि एक भी मनुष्य इस लेख को पढ़कर अपने को बदल सके तो यह मनुष्यता की जीत होगी।

6 टिप्‍पणियां:

  1. मैं आपसे पुर्णतः सहमत हूँ ....सुन्दर ब्लॉग ..बधाई

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  2. विस्तृत और जानने योग्य जानकारी..... आभार

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  3. यह सिद्ध हैं की मनुष्य का शरीर मांसाहार के लिए नहीं बना है। फ़िर भी वह जीभ के स्वाद के लिए मांसाहार कर रहा है।
    हो सकता है जैविक विकास की प्रक्रिया में चल कर मांसाहारियों जैसे मनुष्य की भी शारीरिक प्रणाली विकसित हो जाए।

    सार्थक लेख के लिए आपको साधुवाद

    घर घर में माटी का चूल्हा

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  4. अमृता जी,
    मोनिका जी,
    ललित जी,

    आभार इस समर्थन के लिये

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  5. बहुत ही ग्यानवर्धक जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

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  6. विस्तृत और जानने योग्य जानकारी..... आभार

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