सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

पौष्टिक, आरोग्यप्रद और रेशा समृद्ध शाकाहार


जीवन का  सेहत भरा तरीका
सभी चोकर सहित अनाज व दालें, ताज़े फल,
मेवे और सब्ज़ियाँ आहार-रेशों के प्रमुख स्रोत है।
पोषण ऐसा विज्ञान है जो प्रकृति एवं भोजन में पौष्टिक तत्वों के वितरण, उनके उपापचयी प्रभाव और अपर्याप्त खाना खाने के परिणामों से संबंधित है। पौष्टिक तत्व भोजन में पाए जाने वाले वे रासायनिक यौगिक हैं जो भोजन में अवशोषित होकर स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। कुछ ऐसे आवश्यक पौष्टिक तत्व होते हैं जिन्हें हमारा शरीर संश्लिष्ट नहीं कर सकता। उनकी आपूर्ति आहार के द्वारा ही की जानी चाहिए।

आवश्यक पौष्टिक तत्वों में विटामिन, खनिज पदार्थ, एमिनो अम्ल, वसीय अम्ल और ऊर्जा के स्रोत के रूप में कुछ कार्बोहाइड्रेट शामिल हैं। अनावश्यक पौष्टिक तत्व वे होते हैं जो शरीर अन्य यौगिकों से संश्लिष्ट कर सकता है तथापि वे आहार से भी व्युत्पन्न किए जा सकते हैं। पौष्टिक तत्व आमतौर पर वृहत पौष्टिक तत्वों और सूक्ष्म पौष्टिक तत्वों में विभाजित किए जा सकते हैं। वृहत पौष्टिक तत्व आहार और ऊर्जा की आपूर्ति संगठित करने के साथ-साथ शरीर के विकास और उसके विभिन्न क्रियाकलापों के लिए ज़रूरी पौष्टिक तत्व बनाते हैं। कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, सूक्ष्म खनिज तत्व और पानी वृहत पौष्टिक तत्व हैं। सूक्ष्म पोषक तत्वों में विटामिन (पानी और वसा दोनों में घुलनशील) और आवश्यक सूक्ष्म खनिज तत्व शामिल होते हैं। इन पौष्टिक तत्वों की पर्याप्त आपूर्ति अच्छे स्वास्थ्य, कार्यात्मक दक्षता एवं उत्पादकता के लिए बुनियादी मूलभूत ज़रूरत है। पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक भोजन करने से पौषणिक स्थिति बढ़ती है और उसके फलस्वरूप मनुष्यों की सेहत अच्छी रहती है।

पौष्टिक और पर्याप्त भोजन वह होता है जो शरीर की ज़रूरतों के अनुसार सभी पौष्टिक तत्व उपलब्ध कराता है। संतुलित आहार के जरिए अच्छा पोषण मिलता है जिससे आवश्यक और अनावश्यक पौष्टिक तत्व सही व संतुलित रूप में शरीर को मिलते हैं। उच्च स्तर के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए ऐसा होना बहुत ज़रूरी है। पोषण न सिर्फ समुचित शारीरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह पर्याप्त प्रतिरक्षा क्षमता और ज्ञानात्मक विकास भी सुनिश्चित करता है।

शाकाहारी आहार अधिक पौष्टिक होते हैं। पादप उत्पाद जटिल कार्बोहाइड्रेट (आहारीय रेशे), B- कैरोटीन जैसे विटामिन, विटामिन E , एक्रोबिक अम्ल, थियामिन, राइबोफ्लेविन और फोलिक अम्ल तथा अनेक खनिज पदार्थ विशेषरूप से लोहा, कैलशियम, सोडियम, पोटेशियम और आयोडीन का समृध्द स्रोत होते हैं। वे पादप रसायनों और एंटी-ऑक्सीडेंट्स का भी समृध्द स्रोत होते हैं। इसके अतिरिक्त, पादप मूल के ज्यादातर खाद्य पदार्थों में (तेल और तिलहनों को छोड़कर) वसा की अधिक मात्रा नहीं होती है और इनमें मौजूद वसा अपाश्चुरीकृत वसीय अम्लों- MUFAs और PUFAs में समृध्द होते हैं जो अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए भी ज़रूरी होते हैं। उनमें से कुछ आवश्यक वसीय अम्ल के नाम से जाने जाते हैं। शाकाहारी खाद्य पदार्थों में कोलेस्टेरॉल नहीं होता है। शाकाहार रक्त में कोलेस्टेरॉल के स्तर को सामान्य सीमा में रखता है और हृदय धमनी की बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है।

जिगर हमारे शरीर में कोलेस्टेरॉल संश्लेषण का प्रमुख स्थान है। जिगर में संश्लिष्ट कोलेस्टेरॉल का कुछ अंश पित्त अम्लों और पित्त लवणों में मिल जाता है। भोजन को पचाने और उसके अवशोषण में मदद करने के लिए आंत में उपस्थित पित्त भोजन को पचाने में मदद करता है । भोजन के पचने के बाद वह जिगर में जाता है जहां उसे फिर से अवशोषित किया जाता है।आहारीय रेशे इस चक्र को बाधित करते हैं ताकि पित्त लवण को फिर से आंत में अवशोषित होने से बचाया जा सके। इसलिए ये बिना पचे भोजन के साथ मलोत्सर्जित हो जाते हैं। रेशे कोलेस्टेरॉल उत्सर्जन को बढ़ाते हैं और जिगर में कोलेस्टेरॉल की उपलब्धता भी कम करते हैं ताकि संचरित रक्त में कोलेस्टेरॉल समृध्द कण (लाइपोप्रोटीन) मिलाएं जा सकें।

हाल ही में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि आंत्रिक विषाणु के जरिए रेशों का किण्वन होता है जिसके फलस्वरूप शॉर्ट चेन वसीय अम्ल (SFAcs) बनते हैं जो जिगर में कोलेस्टेरॉल संश्लेषण को बाधित कर सकते हैं। इससे इस तथ्य को बल मिलता है कि साबुत अनाज, दलहन (छिलके सहित) और अनेक फल और सब्जियां आहारीय रेशे का समृध्द स्रोत होते हैं। इसके अतिरिक्त फल और सब्जियां बी- कैरोटीन, विटामिन ई, विटामिन सी, और पादप रसायनों का समृध्द स्रोत होते हैं जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं यानी वे रक्त कोलेस्टेरॉल के ऑक्सीकरण को रोकते हैं। यह कोलेस्टेरॉल का मुख्य रूप है जो हमारी धमनियों की भित्तियों में जमा हो जाते हैं। ये कार्डियो प्रोटेक्टिव एजेंट भी मुक्त मूलभूत तत्वों के कारण कोशिका क्षति को रोकते हैं और इसलिए कोशिका का जीवन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

शाकाहारी आहार मधुमेह के उपचार/नियंत्रण में भी मदद कर सकता है। आहारीय रेशे पित्त से ग्लूकोज अवशोषण की दर को नियंत्रित करते हैं और इस प्रकार भोजन के बाद रक्त ग्लूकोज में अत्यधिक वृध्दि नहीं होने देते। भोजन करने के दौरान रक्त ग्लूकोज में तेजी से कमी को भी रोका जा सकता है क्योंकि रेशे गैस को जल्दी नहीं निकलने देते। क्रोमियम और कुछ विशिष्ट विटामिन संशोधित इंसुलिन क्षमता से संबंधित पाए गए हैं। इस प्रकार, शाकाहारी आहार ग्लूकोज सहनशीलता बढ़ाने और विशिष्ट रोगियों में औष्धियों व इंसुलिन की ज़रूरत को कम करने में मदद करते हैं।

शाकाहारी आहार कैंसर रोग का जोखिम कम करने में भी मदद कर सकता है क्योंकि आहारीय रेशे अनेक रयायनों और विषैले एजेंट से लिपट जाते हैं और फलस्वरूप उनको मलोत्सर्जन के रास्ते बाहर निकाल देते हैं। अनेक विटामिन और खनिज पदार्थ भी कोशिका भित्ति की अखंडता बनाए रखने में मदद करते हैं। वे डीएनए और आरएनए जैसी कोशिका के विभिन्न अवयवों को क्षतिग्रस्त होने से बचाते हैं जिनसे टयूमर बनने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

पादप खाद्य पदार्थों का उपभोग उच्च रक्त चाप की आशंका को भी कम करता है। पादप खाद्य पदार्थों में मौजूद रेशे आहारीय सोडियम की कुछ मात्रा से लिपट जाते हैं और फलस्वरूप मलोत्सर्जन के जरिए उसे बाहर निकाल देते हैं। पादप खाद्य पदार्थों में पाश्चुरीकृत वसा कम होती है और कोलेस्टेरॉल नहीं होता इसलिए ये रक्त कोलेस्टेरॉल को बढ़ने से रोकते हैं। अतिकोलेस्टेरॉलरक्तता के फलस्वरूप धमनियों में कोलेस्टेरॉल जमा हो जाता है जो अप्रत्यक्ष रूप से रक्त चाप बढ़ने का कारण बनता है। शाकाहारी भोजन संतृप्ति का पूरा अहसास देता है और यह वजन काबू में रखने में भी मददगार है।

शोध अध्ययनों से संकेत मिलते हैं कि चार सप्ताह की अवधि तक आहार में रोजाना 15 ग्राम ग्वार गम ( क्लस्टर बीन्स के बीज से प्राप्त) जैसे घुलनशील रेशे शामिल करने से कुल कोलेस्टेरॉल को 13 प्रतिशत कम करने तथा भोजनोत्तर रक्त ग्लूकोज को 21 प्रतिशत कम करने में मदद मिल सकती है। गेंहू के आटे के बदले साबुत बंगाली चने के 50 ग्राम बेसन के उपभोग से कुल कोलेस्टेरॉल को 6.2 प्रतिशत कम करने में सहायता मिल सकती है। सोया आटे और जई के चोकर के अनुपूरकों के मामले में भी ऐसे ही सकारात्मक प्रभाव देखे गए हैं।

हालांकि विशुध्द रूप से शाकाहारी आहार ( जिसमें दूध और दूध उत्पाद शामिल न हों ) में प्रोटीन कम होती है। पादप खाद्य पदार्थों में प्रोटीन का प्रमुख स्रोत दलहन और गिरीदार फल हैं। मोटे अनाज सामान्य स्रोत हैं जबकि फल और सब्जियों में बहुत कम प्रोटीन होता है। इसके इसलिए आहार में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 2-3 सर्विंग साबुत दलहन और कुछ गिरी (बादाम) जरूर खानी चाहिए। साबुत दलहनों को अंकुरित करके, मोटे अनाजों और दलहनों को मिलाकर लेने तथा मोटे अनाजों और दलहनों को खमीर उठा कर उपयोग में लाने से प्रोटीन की जैव-उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है और इस प्रकार आहार को संतुलित बनाने में सहायता मिल सकती है। शाकाहारवाद सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है। मौजूदा रहन सहन और आहार संबंधित त्रुटियों के मद्देनजर अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए शाकाहार को अपनाना अच्छा विकल्प है।
••स्वतंत्र लेखक : डॉ. संतोष जैन पासी

2 टिप्‍पणियां:

  1. स्वास्थ्य के बारे में बहुत काम पढने को मिलता है आपके इस प्रयास से वास्तव में लाभ होगा
    धन्यवाद

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  2. @पादप उत्पाद जटिल कार्बोहाइड्रेट (आहारीय रेशे), B- कैरोटीन जैसे विटामिन, विटामिन E , एक्रोबिक अम्ल, थियामिन, राइबोफ्लेविन और फोलिक अम्ल तथा अनेक खनिज पदार्थ विशेषरूप से लोहा, कैलशियम, सोडियम, पोटेशियम और आयोडीन का समृध्द स्रोत होते हैं। वे पादप रसायनों और एंटी-ऑक्सीडेंट्स का भी समृध्द स्रोत होते हैं। इसके अतिरिक्त, पादप मूल के ज्यादातर खाद्य पदार्थों में (तेल और तिलहनों को छोड़कर) वसा की अधिक मात्रा नहीं होती है और इनमें मौजूद वसा अपाश्चुरीकृत वसीय अम्लों- MUFAs और PUFAs में समृध्द होते हैं जो अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए भी ज़रूरी होते हैं। उनमें से कुछ आवश्यक वसीय अम्ल के नाम से जाने जाते हैं। शाकाहारी खाद्य पदार्थों में कोलेस्टेरॉल नहीं होता है।

    ऐसे स्वास्थ्यपरक और उपयोगी आलेख के लिये डॉ. संतोष जैन पासी का आभार. शाकाहार की उपयोगिता दर्शाती इस प्रविष्टि की प्रस्तुति के सार्थक कार्य के लिये निरामिष का आभार!

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