सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

शाकाहार की धूम - बेल्जियम के बाद अब जर्मनी


"शाकाहारियों के लिए तो टोफू (Tofu = सोयाबीन का पनीर) प्रोटीन का भंडार है। मैंने तब पहली बार उसे चखा और बस मैं सन्डे वेगन बर्गर्स की फैन हो गई।"
~ जेनी हॉफ़ (पत्रकार, दोयेचे वेले, कोलोन)
शाकाहार अब कहीं भी दुर्लभ नहीं रहा
जर्मन खानपान की बात चलने पर लोगों का ध्यान बीयर और सॉसेज पर ही जाता है। यह सच है कि पुराने ज़माने के यूरोप मे शाकाहार की सम्भावना भारत जैसे हरीतिमा भरे देश से कहीं कम थी, मगर आज के समय में यह सब स्टीरियोटाइपिंग जैसा लगता है। आइये आपका परिचय करायें एक आधुनिक जर्मनी से जिसे पुराने रंग में रंगना आसान नहीं है। आज के जर्मनी में रहने वाले लोगों के खान पान में बड़ा परिवर्तन आ रहा है। शाकाहार का प्रयोग दिन दूना रात चौगुना बढ रहा है। जर्मनी के एक प्रमुख शाकाहारी रसोइये अटिला हिल्डमैन अब शाकाहारी भोजन विधि की पुस्तकें छापने लगे हैं और एक बड़ी एजेंसी उनका काम काज देखती है। वे कई स्थानीय टीवी कार्यक्रमों में दिखाई देने लगे हैं। जल्दी ही उनकी एक और नई किताब "वीगन फॉर फन" बाज़ार में आ रही है।

जर्मन रेडियो दोयेचे वेले (कोलोन, जर्मनी) की रिपोर्टर जेनी हॉफ़ के अनुसार कभी मांस के दीवाने रहे जर्मनी के लोग अब वोनर्स और सन्डे वेगन बर्गर्स का मजा ले रहे हैं। जेनी हॉफ़ ने स्वयं भी 11 वर्ष की उम्र में शाकाहार अपना लिया था जो कि आज तक बरकरार है।

"बर्लिन में शाकाहारी जुनून से मेरा सामना अचानक हुआ। भाषा सिखाने वाले इंस्टीट्यूट की पार्टी से वापस आकर मैं इंटरनेट पर ऑनलाइन दोस्तों की तलाश कर रही थी जब मैंने शाकाहारी खानसामा (वीगन शेफ) अटिला हिल्डमान की प्रोफाइल देखी। मैं एक वीगन शेफ को बर्लिन में देख हैरान थी।" ~ जेनी हॉफ़

जर्मनी में भोज्य सामग्री की एक विशिष्ट और प्राचीन परम्परा रमटॉफ़ (Rumtopf) है जिसमें विभिन्न प्रकार के फलों को सुरक्षित रखने के लिये उन्हें विशिष्ट प्रकार के खूबसूरत मर्तबानों में गन्ने के रस से बनी मदिरा में डुबोकर रखा जाता है। समय के साथ अन्य मौसमी फल जुड़ते जाते हैं और सर्दियों में जब प्राकृतिक फलों की कमी होती है तब रमटॉफ़ खाये जाते हैं। लेकिन आजकल वहाँ शाकाहारी और वीगन भोजन का परिचय और उसके स्वास्थ्यप्रद होने के बारे में जानकारी बढ रही है। और इसके साथ ही बढ रहे हैं शाकाहारी भोजनालय।

"मुझे हर वक्त किसी न किसी का ई-मेल या फोन आता रहता है। जगह-जगह के लोग मेरे साथ शाकाहारी रेस्त्रां खोलना चाहते हैं।" ~ अटिला हिल्डमान

जर्मनी में शाकाहार के प्रति बढती रुचि का कोई एक कारण देना आसान नहीं है पर यह सच है कि वहाँ वीगन और वेजीटेरियन, इन दोनों प्रकार के शाकाहारी ढाबे और यहाँ तक कि भोजन-रेहड़ियाँ तक न केवल बढ रही हैं, बल्कि अधिकाधिक ग्राहक आकर्षित कर रही हैं। टोफू, सलाद, अंकुरित अनाज, टमाटर, तले प्याज, अचार और खीरे के साथ शाकाहारी सैंडविच जैसे भोज्य पदार्थ जर्मन नगरों में आम होते जा रहे हैं।

22 वर्षीया जर्मन युवती मैंडी क्रित्ज ने पिछले आठ सालों से मांस या मछली नहीं खाई है। क्रित्ज ने कहा कि जब उन्होंने मांसाहार त्यागा, तब उसकी मां को यह फैसला बड़ा अजीब लगा था। आज की जर्मनी में तो निरामिष भोजन का बहुत प्रसार हुआ है। तब की जर्मनी में शाकाहारी रहना उतना आसान नहीं था परन्तु कठिनाई के बावजूद उन्होंने शाकाहार को अपनाया।

शाकाहार की मांग अब इतनी बढ़ गई है कि मुझे शायद एक और रेस्त्राँ खोलना पड़ेगा। फिलहाल तो अपने बढ़ते ग्राहकों के लिए मेरे पास जगह नहीं है। ~ श्रीमान रे (सन्डे वीगन बर्गर्स, मावर पार्क, बर्लिन)

बर्लिन के एक शाकाहारी भोजनालय सन्डे वीगन बर्गर्स के संस्थापक ने बताया कि जब वे पहली बार जर्मनी गये तो शाकाहारियों के लिए वहां कुछ नहीं पाया। तब उन्होंने कुछ हजार यूरो निवेश करके एक ट्रेलर और खाना पकाने के लिए कुछ बर्तन खरीदे और अपने रेस्त्रां को खूबसूरती से रंग कर हिंसारहित और क्रूरता-मुक्त सन्डे वीगन बर्गर्स बेचना शुरू कर दिया। जिसने भी चखा वह अगली बार किसी और को साथ लेकर आया और उनका नाम और काम भी बढ़ने लगा।

हम करीब १५-१६ साल से शाकाहारी हुये हैं, हम क्या हमारे साथ-साथ कई जर्मन भी शाकाहारी हुये हैं। जब हम मांसाहारी थे और फिर शाकाहारी हुये इन दोनो में हमने अपने आप में बहुत परिवर्तन देखा।   ~ वरिष्ठ हिन्दी ब्लॉगर श्री राज भाटिया (बेयर्न, जर्मनी)

कभी हर भोजनालय में केवल एक या दो शाकाहारी डिश और सलाद रखने वाले बर्लिन नगर में 50 से अधिक रेस्त्राँ इस समय शुद्ध शाकाहारी या प्रमुखतः शाकाहारी भोजन प्रस्तुत करते हैं। जर्मनी के नगर हैम्बर्ग के नाम पर आधारित मांसाहारी हैम्बर्गर बेचने वाले छोटे-मोटे ढाबे भी अब अपने यहाँ शाकाहारी बर्गर बेच रहे हैं। अगली बार आप जर्मनी जायें तो वेटर को जर्मन में गर्व से बताइये

Ich bin Vegetarier (मैं शाकाहारी हूँ)

और उससे आत्मविश्वास से पूछिये
Haben Sie etwas ohne Fleisch? (क्या आपके पास मांसरहित सामग्री है?)

यक़ीन मानिये, आपको निराश नहीं होना पड़ेगा। न केवल उसका उत्तर हाँ में होगा, एक अलग प्रकार के निरामिष भोजन का आपका अनुभव भी तृप्तिकर होगा।

Ja, wir haben Vegetarische Kost (जी हाँ, हमारे पास शाकाहारी भोजन है।)

शाकाहार अपनाइये, जीवदया का विस्तार कीजिये, पर्यावरण रक्षण कीजिये, स्वस्थ रहिये!
जानकारी: विभिन्न समाचार स्रोतों से साभार संकलित
कीवर्ड्स: शाकाहार, विदेश, पोषण, वीगन, जर्मनी

15 टिप्‍पणियां:

  1. आभार - यह जानकारी हम सब से शेयर करने के लिए | सारी दुनिया में बड़ी तेज़ी से शाकाहार का प्रचालन बढ़ रहा है| यह इन बातों को दर्शाता है कि

    * इस पोषण के बारे में अत्यधिक रूप से जागरूक दुनिया में यह बात निर्विवाद स्थापित हो चुकी है कि शुद्ध शाकाहारी भोजन किसी तरह से किसी पोषक तत्वे से विहीन नहीं है / अपोषण से होने वाली बीमारियों को जन्म नहीं देता | नहीं तो इतने उन्नत समाजों में शाकाहार के प्रति रुझान बढ़ ही नहीं सकता था, क्योंकि लोग अपनी सेहत के साथ जानते बूझते नहीं खेलते |

    * जैसे जैसे मानवता सभ्यता की और विकसित होती जायेगी, वैसे वैसे स्वयं ही शाकाहार का प्रचालन बढेगा, क्योंकि सभ्यता और हिंसा का मेल हो नहीं सकता है |

    * विकसित देश यह बात भी समझते जा रहे हैं कि पर्यावरण कितने खतरे में है - और मांसाहारी उद्योगों से पर्यावरण को कितना भयंकर नुकसान पहुंचा रहे हैं , और आगे जा कर यह धरती के अस्तित्व पर ही खतरा बना देगा |

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  2. बहुत ही अच्छी जानकारी... इसे कहते हैं कि पत्तियों को देखकर पत्तियों ने रंग बदलना शुरू कर दिया है.. यह उम्मीद जगती है कि धरा हरी होगी!!

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  3. बदलाव आने में समय लगना तो स्वाभाविक है. प्रवृत्तियों को बदलने में थोड़ा सा समय तो लगेगा ही, लेकिन निश्चित रूप से बदलाव आयेगा और एक शाकाहारी विश्व सामने आयेगा.

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  4. आप का मेल स्पाम मे था, जब भी मै स्पाम की मेल हटाता हुं तो एक नजर जरुर देख लेता हुं, ओर नजर पढी आप की मेल पर, वर्ना एक अच्छी जानकारी से वंचित रह जाता.
    आप ने बहुत अच्छा लेख लिखा,जर्मन मे आम रेस्ट्रारेंट मे आप को वेजिटेरियन खाना मुश्किल से ही मिलेगा, यह खाना यहां के रहने वाले तो मंगवालेते हे, लेकिन अजनबी को यह सब समझाने मे दिक्कत आती हे, हां बडे शहरो मे भारतिय लोगो ने मासा हारी के संग संग शाका हारी रेस्ट्रारेंट खोल रखे हे, ओर फ़िर इन की देखा देखी कुछ जर्मन ओर अन्य विदेशी लोगो ने भी शाका हारी खाना परोसना शुरु किया, यहां मीट बहुत सस्ता हे ओर ऊच श्रेणी का मिलता हे, सब्जिया मिलती हे लेकिन सब विदेशो से आती हे, इस लिये थोडी महंगी हे, हम जैसो को देख कर ओर हमारे घरो मे यह लोग जब खाना खाते हे तो हेरान होते हे कि बिना मास के इतना स्वादिष्ट खाना भी बनता हे, फ़िर यहां टी वी पर मासा हारी ओर शाका हारी मे फ़र्क दिखाते हे, ओर अब कई जर्मन शाका हारी बन गये हे, लेकिन अब यह लोग शाका हारी खाना बहुत खुश हो कर खाते हे, यहां मेकडोनल, बर्गर किंग ओर अन्य रेस्ट्रारेंट मे अब आप को शाका हारी बर्गर ओर अन्य खाना भी मिलेगा,Haben Sie etwas Vegetarische Kost ऎसा कहे तो होटल वाला आप को हां या ना मे जबाब देगा :)आलू के चिप्स, आलू का सलाद, ओर हरा सलाद, बरेड, चीस( केजे जर्मन मे ) आप को हर रेस्ट्रा रेंट मे मिल जायेगे, जिस से आसानी से पेट भरा जा सकता हे, या फ़िर आप को नुडल अगल अगल शोशे के संग मिल जायेगी, या फ़िर पिज्जा बिना सलामी के, बिना शिंकन के मंगवाये, बिना मच्छली के,
    अगर आप को ज्यादा जानकारी चाहिये तो उन शव्दो को क्रम से लिख दे, मै उन्हे जर्मन मे लिख कर आप को भेज दुंगा,जैसे बात चीत करनी हो तो ,उन शव्दो को हिंदी मे लिखे ओर भेजे क्योकि आप की कलम मे जादू हे, ओर आप इस सब को अपने तरीके से लिखे तो ज्यादा अच्छा लगेगा, लेकिन इतना आसान नही एक अजनबी आदमी को युरोप मे शाका हारी खाना मिलना, इस सब का आसान सा तरीका हे किसी भी सुपर स्टोर मे जाये ओर वह से मनपसंद खाना खरीद ले,या फ़िर किसी भारतिया रेस्ट्रा रेट को ढुढे, या फ़िर आप को जर्मन के कुछ शव्द समज मे आने चाहिये, क्योकि यहां अग्रेजी किसी भी युरोपियन देश मे नही चलती, लोग जानते हे लेकिन नही बोलते, बहुत लंबी टिपण्णी हो गई राम राम

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    1. राज जी, निरामिष ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है। आप तो निरामिष है आपका कथन पोस्ट में है। आपने जर्मनी के बारे में विस्तार से उपयोगी जानकारी दी जो हमारे कईं निरामिष पाठको के लिए काम आएगी।

      आपके निरामिष बनने के बाद के अनुभव भी हमारे साथ शेयर करें। हमारे लिए पथप्रदर्शन का कार्य करेंगे।
      आपका बहुत बहुत आभार भाटिया जी॥

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    2. बहुत कुछ जानने को मिला शाकाहार के प्रसार के विषय में आप के द्वारा ................. और यह भी की अँग्रेजी की गुलामी ढोने मे हिन्दुस्तानी ही अपनी शान समझते हैं।

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  5. वैसे मेरे यहां तो शुद्ध शाका हारी खाना मिलेगा जब भी आओ...:)

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  6. ज्यों ज्यों सभ्यता आती है मानव जीवन सात्विकता की और अग्रसर होता है। दया-करूणा अब युनिवर्सल होती जा रही है। मानव जब सात्विक और उन्नत विचारों की और अग्रसर होता है तो अहिंसा अपनाता है। अहिंसा का पहला कदम ही शाकाहार है। सर्व कल्याण कारणम्!!

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  7. शाकाहारी होना विश्व में सभी जगह गौरवानुभूति बन रहा है।

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  8. अच्छी शुरुआत है..... सोच और व्यवहार में ऐसा परिवर्तन पूरे विश्व के लिए सुंदर सन्देश देने वाला है.....

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  9. बहुत विशिष्ट जानकारी दी आपने...मेरे इस लेख को पढ़ने वाले सभी पाठकों के लिए विषय से संबंधित रूप में ज्ञानवर्द्धक साबित होगी।
    पोस्ट करने के लिए आभार
    आपका स्वागत है !
    ढेर सारी शुभकामनायें.!!
    Active Life Blog

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  10. काश! मेरे जीवन में ही मुझे देखने को मिले की सम्पूर्ण विश्व निरामिष परिवार का सदस्य बन जाये।

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  11. वाह!
    बहुत अच्छी जानकारी प्रस्तुत की है.
    पिछले वर्ष जून में जर्मनी गए थे.
    शाकाहारी बढ़िया भोजन मिल गया था.
    कोई परेशानी नहीं हुई,इसका मुझे आश्चर्य हुआ था.
    फिर हमारे राज भाटिया जी तो हैं ही वहाँ.
    सांपला में उनसे मिलना हुआ था,बहुत ही अच्छा लगा उनसे मिलकर.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

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