शनिवार, 21 जनवरी 2012

भारत के प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट हुसैन ज़ामिन जी को नमन

यह अपडेट भारत के प्रसिद्ध कार्टून आर्टिस्ट श्रीमान हुसैन जामिन साहब का है। यह अपडेट अपने आप ही बहुत कुछ बयान कर रहा है। मुझे और कुछ लिखने या कहने की जरूरत नहीं। श्री जामिन साहब का कहना है कि यह उनका नितांत व्यक्तिगत फैसला है। इस अपडेट के माध्यम से वे न तो मुस्लिम समुदाय के विरुद्ध कोई सन्देश दे रहे हैं और न ही अपने इस कृत्य के जरिये किसी भी अन्य व्यक्ति की जीवन शैली या भोजन शैली को प्रभावित करना चाहते हैं।

श्रीमान हुसैन जामिन साहब का फेसबुक अपडेट 

भारत के शिरोमणि कार्टूनिस्टों में शुमार श्री हुसैन ज़ामिन जी के इस निर्णय पर सादर नमन!

इसी ब्लॉग पर उन महानुभावों के बारे में जान चुके हैं  जिन्होने गतवर्ष शाकाहार अपनाकर अहिंसा और जीवदया के सद्प्रयास को बल दिया:
* दीप पांडेय
* इम्तियाज़ हुसैन
* कुमार राधारमण
* शिल्पा मेहता

19 टिप्‍पणियां:

  1. एक सम्वेदनशील दिल से करूणा की सरीता तो बहेगी ही!!
    सलाम हुसैन ज़ामिन साहब के कोमल हृदय को!! उनके मन के निर्मल भाव का सम्मान करते है।

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  2. सुप्रसिद्ध कलाकार हुसैन ज़ामिन जी की चित्रकारी से बचपन से ही प्रभावित रहा हूँ। पर आज तो वे वाकई दिल जीत ले गये।
    जीवहिंसा को प्रोत्साहन देने के लिये मायावाती द्वारा प्रस्तावित नये क़त्लखानों का मैं विरोध करता हूँ!

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  3. मेरी मुलाकात भी जामिन साहब से फेसबुक के जरिये हो चुकी है. उनका यह कदम तो वाकई प्रशंसनीय है.

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  4. श्रीमान हुसैन जामिन साहब का यह अपडेट पढ़कर मुझे बहुत अच्छा लगा और फिर मैंने उनसे इसे पोस्ट करने की इजाजत मांगी जो उन्होंने देकर उपकृत किया.

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    1. यह आपने अच्छा ही किया दयानिधि जी। मानव मननशील प्राणी है, न जाने कब किसका हृदय परिवर्तन हो जाये। यहाँ अमेरिका में देखता हूँ कि बहुत से मांसाहारी बच्चों को मांस के पीछे छिपे प्राणी की पीड़ा की जानकारी ही नहीं है। लेकिन जब कभी उन्हें इसकी असलियत पता लगती है तो वे अपने आहार की प्रकृति बदले बिना नहीं रह पाते हैं। स्वामी विवेकानन्द ने भी कहा है कि जिनका शुद्ध सत्व विकसित होता है मांस-मच्छी के प्रति उनकी सारी रुचि नष्ट हो जाती है। यह आत्मा के उदात्त होने का चिन्ह है।

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  5. इसमें दो नाम जोड़ लीजिये
    प्रसाद चितारे और आशीष कुमार
    बड़े ही दिल वाले है ये लोग

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    1. दोनों ही महानुभावों का अभिनन्दन.

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    2. प्रसाद चितारे और आशीष कुमार का भी अभिनन्दन! शाकाहार-जगत में सभी का स्वागत है!

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  6. बहुत ही सुन्दर कार्य, जीवों पर दया हो..

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  7. yeh to mera vyaktigat saadharan sa faisla hai,,,,mere anek mitra aur bhai Abbas Zamin sahab, behnoi Husain Ali sahab bhi barson se shuddh shakaahari hi hain....

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    1. सबसे पहले तो हम आपका इस निरामिष ब्लॉग पर स्वागत करते है। सहमत है इस बात से कि यह आपका व्यक्तिगत फैसला है। दया, करूणा व सम्वेदनाएं हमेशा व्यक्तिगत स्तर पर ही पनपती है आपके दिल की उन कोमल भावनाओं का ही सम्मान कर रहे है। भाई अब्बास साहब और जनाब हुसैन अली साहब का भी तहेदिल से अभिनन्दन करते है। कुल मिलाकर एक ही बात है कि विशेषरूप से रहम के लिए शाकाहार अपनाया जाय। और हिंसा - हत्या के गैर जरूरी समर्थन से बचा जाय।

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    2. निजी निर्णय तो और भी ज्यादा प्रशंसनीय है | जो निर्णय धर्म के/ समाज के या किसी के कहने से लिया जाए, या, जो शाकाहार अपनी बचपन से देखी हुई जीवनचर्या से आये , वह तो comfort zone है | किन्तु जो निर्णय अपनी accepted जीवनचर्या से अलग हट कर सिर्फ करुणा भाव से लिया जा रहा है, वह व्यक्ति की इंसानियत को दर्शाता है |

      एक भी व्यक्ति के निजी रूप से भी यह परित्याग करने से अनेकों जीव इस असह्य पीड़ा और अकाल मृत्यु से बच जाते हैं |

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    3. हुसैन जामिन जी, आपको यहाँ देखकर बहुत अच्छा लगा!

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर उनको शत शत नमन!

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  9. यह लाघुपोस्ट या उद्धरण यह साबित करता है कि कलाकारों का न तो कोइ मज़हब होता है न ज़ात.. और संवेदनाएं तो इन सबसे परे एक स्वर्गिक आनुभव है... इस महान कलाकार की संवेदनाओं के आगे नतमस्तक हूँ!! वास्तव में निरामिष का उद्देश्य ही उस संवेदना को जीवित करना है जो हमें जीवों और जीवन के प्रति संवेदनशील बनाती है!!

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    1. सही कहा सलिल जी, निरामिष का उद्देश्य कुंद और निष्ठुर होती जा रही सम्वेनाओं को जीव और जीवन के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास ही है।

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